EYE (नैत्र विभाग)

उपलब्ध सुविधाएं

  • स्विस फेको मशीन द्वारा मोतियाबिंद का बिना टांके का ऑपरेशन।
  • कम्प्युटराइज्ड मशीन द्वारा चश्मे के नम्बर की जांच ।
  • कान्टेक्ट लेन्स क्लिनिक ।
  • इम्र्पोटेड लेन्स प्रत्यारोपण की सुविधा ।
  • एप्लेनेशन टोनोमीटर द्वारा आँखों के दबाव की जांच ।
  • बी स्केन द्वारा आँखों की सोनोग्राफी की सुविधा
आज की अत्याधुनिक मोतियाबिंद की सर्जरी आपके जीवन को कैसे बदल देती है ।

आँख कैसे कार्य करती है

इन्सान की आँखे एक कैमरे की तरह ही काम करती है । कैमरे के लेन्स से प्रकाश गुजरता और फिल्म पर केन्द्रित होता है । आपकी आँखे उसी तरह, लेकिन कुछ जटिल रूप से कार्य करती है ।

आपकी आँखों में भी एक लेन्स है । लेकिन फिल्म की तरह रेटिना पर ही चित्र का निर्माण होता है, जो की आँख के पीछे होता है। आमतौर पर, लेन्स एक स्वच्छ पारदर्शी रचना है जिस पर प्रकाश आसानी से गुजरता है एवं रेटिना पर प्रकाशमान होती है ।

रेटिना प्रतिबिम्ब से प्रभावित होता है एवं आपके मस्तिष्क में संकेत भेजकर तुरन्त चित्र का निर्माण करता है ओर दृष्टि के अनुसार हमारी आँख पर परिवर्तित करता है।

मोतियाबिंद से प्रभावित आँख आपकी दृष्टि पर कैसे प्रभाव डालती है ।

यदि, धुंधले लेन्स पर किसी प्रतिबिंब से प्रकाश निकलकर गुजरता है तो टूट जाता है फलस्वरूप प्रतिबिंब अस्पष्ट एवं अधूरी दिखाई देता है ।
मोतियाबिंद क्या है ?

मोतियाबिंद के कारण

मोतियाबिंद आपके आँखों के लेन्स को धुंधलाकर दृष्टि को कमजोर कर देता है । ढलती उम्र बुढापा भी मोतियाबिंद का कारण है और अन्य कारण भी हैं जैसे आँखों की दुर्घटना, बीमारियाँ और लम्बे समय तक कुछ दवाइयों का सेवन, इत्यादी ।

मोतियाबिंद के लक्षण

प्रतिरोध एवं उपचार ही महत्वपूर्ण है ।

  • हल्के रंग अगर धुंधले या फीके लगे
  • हरे एवं पीले रंग जल्द साफ नजर न आये ।
  • छोटे छपाई के अक्षरो को पढ़ने में कठिनाई होना ।
  • जैसे रातों में अधिक प्रकार अथवा चमकदार रोशनी का अनुभव करना । विभिन्न प्रकार के स्त्रोत पर धुंधलापन, सड़क पर वाहनों के हैड़लाइट् पर धुंधलापन महसूस करना ।
मोतियाबिंद का उपचार कब शुरू हो.......
शल्यचिकित्सा ही इसका एकमात्र उपचार है । इसमें धुंधले लेन्स को निकालकर इसकी जगह पर इन्ट्रा ओकुलरलेन्स लगाया जाता है । यह इन्ट्राओकुलर लेन्स स्थायी एवं सहज दृष्टि प्रदान करता है । इस समय आंखो के चिकित्सक ऐसी शल्य चिकित्सा का प्रदान करे रहे है । जो सूक्ष्म छेद पर आधारित है । अतः इसमे टांका लगाने की आवश्यकता नही रहती है।
इस शल्य चिकित्सा तकनीक को Phacoemulsification (फेकोएमल्सिफिकेशन) अथवा Phaco- surgery (फेको-सर्जरी) कहेते है ।

अतिसूक्ष्म छेद

Phaco Surgery (फेको-सर्जरी) गुणवत्ता:
  • आँखों की दृष्टि तुरन्त लौट आना (तत्काल निवारण)
  • आँखों को बहुत ही कम नुकसान
  • चिकित्सा के तुरन्त बाद साधारण कार्य करना
  • Astigmatism पर बेहतर नियंत्रण

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